वैदिक परिचर्चा/Vedic Paricharcha

Date
March 30, 2017

 

 

vedic paricharcha

                                                                                                                                                                      See English translation below

श्री शंकर शिक्षायतन द्वारा दिनांक 30.03.17 को भारतीय पुरातत्त्व परिषद्, नई दिल्ली के सभागार में वैदिक परिचर्चा का समायोजन किया गया । इस परिचर्चा में श्री लालबहादुर शास्त्री, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली के उपाचार्य डॉ. रामानुज उपाध्याय एवं डॉ. प्रभाकर प्रसाद द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया गया । परिचर्चा की अध्यक्षता डॉ. सन्तोष कुमार शुक्ल, उपाचार्य, विशिष्ट संस्कृत अध्ययन केन्द्र, जे.एन.यू. नई दिल्ली ने किया ।

इस परिचर्चा के प्रथम वक्ता डॉ. रामानुज उपाध्याय ने पं. मधुसूदन ओझा प्रणीत यज्ञसरस्वती ग्रन्थ में वर्णित वैदिक यज्ञ पर प्रकाश डालते हुए वैदिक यज्ञ के स्वरूप एवं उसकी उपादेयता पर विस्तृत विमर्श प्रस्तुत किया । उन्होंने बतलाया कि इस ग्रन्थ के मङ्गलाचरण में ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि विष्णु एवं हिरण्यगर्भ ही यज्ञ है और इन्हीं से समग्र संसार की सृष्टि होती है । उन्होंने शतपथब्राह्मण के आख्यान में उल्लिखित स्वैदायन ऋषि द्वारा उद्दालक ऋषि के प्रति पूछे गये विविध रोचक प्रश्नों एवं उनके याज्ञिक उत्तरों का विस्तार से प्रतिपादन किया ।

द्वितीय वक्ता डॉ. प्रभाकर प्रसाद ने ओझाजी के शारीरकविज्ञान को आधार बनाकर ब्रह्म, मोक्ष, सृष्टि आदि विषयक ओझाजी के मन्तव्य को स्पष्ट करते हुए अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया ।

इस परिचर्चा में परिचर्चक के रूप में श्री लालबहादुर शास्त्री, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली के उपाचार्यों डॉ. सुन्दरनारायण झा, डॉ. रामचन्द्र शर्मा एवं डॉ. मारकण्डेयनाथ त्रिपाठी द्वारा दोनों वक्ताओं के व्याख्यान पर परिचर्चा के क्रम में अनेक प्रश्नोत्तरों एवं जिज्ञासाओं के माध्यम से उक्त विषय पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया ।

इस परिचर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय के विविध महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, श्री लालबहादुर शास्त्री, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ एवं इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अनेक विद्वानों- डॉ. हरीश, डॉ. सरस्वती, डॉ. आशा तिवारी, डॉ.  अमित शर्मा, डॉ. मैत्रेयी, डॉ.सुरेन्द्र महतो ,डॉ. अशोक कुमार, डॉ. हरेती लाल मीणा, डॉ. प्रियंका पाण्डेय, डॉ. सुषमा, डॉ. मणि शंकर द्विवेदी, आदि अनेक विद्वानों के अतिरिक्त अनेक शोधच्छात्रों ने अपने प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं से परिचर्चा को सफल बनाया । कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री शंकर शिक्षायतन के वरिष्ठ अध्येता डॉ. लक्ष्मीकान्त विमल ने किया ।
 

 Vedic Paricharcha: A report of the interaction

Shri Shankar Shikshayatan organised a Vedic paricharcha (discussion) on March 30, 2017 at Bharatiya Puratatva Parishad, New Delhi. Main speakers at the discussion included Assistant Professors of Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit Vidyapeeth, Dr Ramanuj Upadhyaya and Dr Prabhakar Prasad. The meeting was chaired by Dr Santosh Shukla, Assistant Professor of Sanskrit Studies at Jawaharlal Nehru University, New Delhi. 

Dr Ramanuj Upadhyaya spoke on Pandit Madhusudan Ojha’s Yagyasaraswati. He spoke on the practice of yajna and its various facets and values. He said the Ojhaji in his book has made it clear that Vishnu or Hiranyagarbha was yajna from where the universe came into being. He referred to the interesting dialogue between rishis Svaidayan and Udhalaka contained in Shatapathabrahmana to explain the concept of yajna. 

The second subject of discussion was sharirika-vijnana or the science of human body. Basing his arguments on Pandit Ojhaji’s book on sharirikvigyan, Dr Prabhakar Prasad expounded on the true meaning of Brahma, moksha (liberation) and srishti (creation).  
Both the subjects were further expanded and argued by the three discussants, Dr Sundarnarayan Jha, Dr Ramachandra Sharma and Dr Markandeynath Tripathi of Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit Vidyapeeth. Through an interesting interactive session, the three speakers made the subjects more accessible to a wider audience. 

The discussion was attended by several teachers and students from Delhi University, JNU, Rashtriya Sanskrit Vidyapeeth and Indira Gandhi National Centre for Arts. They included: Dr Harish, Dr Saraswati, Dr Asha Tiwari, Dr Amit Sharma, Dr Maitreyi, Dr Surendra Mahto, Dr Ashok Kumar, Dr Hareti Lal Meena, Dr Priyanka Pandey, Dr Sushma and Dr Mani Shankar Dwivedi. 

The meeting was coordinated by Dr Laxmikant Vimal of Shri Shankar Shikshayatan.