Manushothamkrishnarahasya

मनुशोत्तामकृष्णारहस्य 

मनुष्य होते हुए भी कृष्णा में ही सत्य क्यों उतरा ? संसार ने उन्हें ही पूर्णवातर क्यों माना ?     
कृष्णा जगद्गुरु क्यों कह लाये ? इन्हें ईश्वर क्यों माना गया? इत्यादि प्रश्नों का समाधान करते हुए कृष्णा के सात धर्मों की स्वरूप का बड़े विस्तार के साथ विवेचन किया गया हैं. 
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