National Webinar on Ishopanishad

Shri Shankar Shikshayatan organised a National Webinar on Ishopanishad on July 28, 2020.

 

 

Report

National Webinar on Ishopanishad

 

The term, isha, refers to paramatma, the supreme being. The universe is the outcome of that supreme being’s desire. This universe is made up of 16 purusha or entities—shodashipurush. Ishopanishad gives a vivid account of purusha and nature, and hence of the universe. Pandit Motilal Shastri has given a comprehensive account of these elements in his commentary on the Upanishad. (texts accessible on http://shankarshikshayatan.org/resources/upanishadavigyanabhasha-bhumika).

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See commentaries on Upanishad by Pandit Motilal Shastri here

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श्री शंकर शिक्षायतन द्वारा दिनांक २८ जुलाई २०२० को संन्ध्या ३ बजे से ८ बजे तक एकदिवसीय बेब आधारित राष्ट्रीय उपनिषद्विमर्श का समायोजन किया गया। इस विमर्श का विषय ईशोपनिषद्विमर्श (पण्डित मोतीलाल शास्त्री के आलोक में) था । यह आयोजन गूगल मीट के माध्यम से दो सत्रों में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री ला. ब. शा. रा. सं. विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के वेद विभाग के आचार्य प्रो. रामानुज उपाध्याय के वैदिक मंगलाचरण से हुआ।   उद्घाटान सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. मुरली मनोहर पाठक, अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने ईशोपनिषद् के प्रथम मन्त्र की व्याख्या करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि ईश शब्द परमात्मा का वाचक है। उस परमात्मा को आकांक्षा होती है। जिस तत्त्व की आकांक्षा होती है वह जगत् है।  यह जगत् षोडशीपुरुषात्मक है। इस उपनिषद् में मुख्यतः पुरुष और प्रकृति का निरूपण है। यह उपनिषद् विश्व का प्रतिपादन करता है। इस प्रकार इन सभी विषयों पर मोतीलाल शास्त्री ने अपने विज्ञानभाष्य में विशद् विवेचन किया है।   पूरा विवरण यहाँ पढ़े 


 

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पंडित मोतीलाल शास्त्रीजी की उपनिषद् पर भाष्य यहाँ पढ़े