Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture 2020

Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture 2020 on Vyakaranvinod

                                                                                                                                                                                                                     

Renowned Sanskrit grammarian, Prof. Pushpa Dixit, spoke on Vyakaranavinod, a treatise on Sanskrit grammar by Pandit Madhusudan Ojha at the annual Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture in New Delhi on September 28,2009.

 

Vyakaranvinod is a simplified text on Sanskrit grammar written by Pandit Madhusudan Ojha. In six chapters, Ojhaji has explained the intricacies of language and grammar in a comprehensive manner. Ojhaji had kept students of Sanskrit in mind while writing this book.

 

Prof. Dixit, speaking on the subject, said it was difficult for any student to understand the intricacies of Sanskrit grammar from Panini’s Ashtadhyayi and Patanjali’s Mahabhashya. These great works present the fundamental structure of Sanskrit grammar.

 

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पण्डित मोतीलाल शास्त्री स्मारक व्याख्यान

 

व्याकरणविनोदद्विमर्श

 

प्रतिवेदन

श्री शंकर शिक्षायतन द्वारा दिनांक २८ सितम्बर २०२० को सायंकाल ३ बजे से ६ बजे तक पण्डित मोतीलाल शास्त्री स्मारक व्याख्यान का समायोजन किया गया। इस वेब व्याख्यान का विषय व्याकरणविनोदविमर्श था । यह आयोजन गूगल मीट के माध्यम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. सुन्दर नारायण झा के वैदिक मंगलाचरण से एवं प्रो. रामानुज उपाध्याय के लौकिक मंगलाचरण से हुआ।

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इस स्मारक व्याख्यान में स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए प्रो. सन्तोष कुमार शुक्ल, समन्वयक, श्री शंकर शिक्षायतन ने कहा कि श्री ऋषि कुमार मिश्र ने शिक्षायतन की स्थापना की। श्री मिश्र जी पण्डित मोतीलाल शास्त्री के शिष्य हैं । पं. शास्त्री जी पण्डित मधुसूदन ओझा के प्रमुख शिष्य है। श्रीमिश्र जी प्रख्यात राजनेता, अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं के प्रधान संपादक और वैदिकविज्ञान के महान् चिन्तक थे। वैदिकविज्ञान के प्रचार-प्रसार में संलग्न श्री शंकर शिक्षायतन विगत दशक से निरन्तर इस दिशा में कार्य करता आ रहा है। आज देश के प्रख्यात वैयाकर प्रो. पुष्पा दीक्षित जी का पं. ओझा प्रणीत व्याकरणविनोद पर व्याख्यान समायोजित है।

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध वैयाकरण प्रो. पुष्पा दीक्षित जी ने कहा कि पाणिनि की अष्टाध्यायी और पतञ्जलि का महाभाष्य प्रक्रिया को स्पष्ट नहीं करते हैं अपितु ये दोनों ही ग्रन्थ व्याकरण के सिद्धान्त का विश्लेषण करते हैं। कोई भी संस्कृत का छात्र इससे संस्कृत व्याकरण की पदनिष्पत्ति को सरलता से नहीं जान सकता है। इसके लिए भट्टोज दीक्षित का सिद्धान्त कौमुदी और वामन जयादित्य की काशिका ही उपयोगी है। इस व्याख्या के आधार पर प्रो. दीक्षित ने सिद्ध किया कि पं. ओझाजी का यह व्याकरण विनोद प्रक्रिया को प्रस्तुत नहीं करता है अपितु वैयाकरण के सिद्धान्तों को प्रस्तुत करता है। व्याकरण का मुख्य प्रयोजन है कि छात्र रूपसिद्धि की प्रक्रिया को जाने और वाक्यव्यवहार में दक्षता को प्राप्त करे। प्रो. दीक्षित ने कहा कि यह ग्रन्थ अपूर्ण है। हमें इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। इस ग्रन्थ में व्याकरण के सिद्धान्तपक्ष हैं एवं सरल उदाहरणों को भी पं. ओझा जी ने प्रस्तुत किया है। जो छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी है।

 

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