National Webinar on Mundokapanishad

The discussion centred on Pandit Motilal Shastri's commentary on Mundakopanishad.                                                                                                                                                             

 

Mundakopanishad is part of  the Atharvaveda. It has three sections and each section has two parts. The first part of the first section contains description of para vidya (knowledge of inner world) and the second part contains discussions on apara vidya (knowledge of material world).  Read Full Report here

प्रतिवेदन 

 

मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद के शौनक शाखा से सम्बद्ध उपनिषद् है जिसमें कुल तीन मुण्डक हैं। प्रत्येक मुण्डक में २-२ खण्ड हैं । इस प्रकार दोनों मुण्डकों में कुल ६ खण्ड हैं। प्रथम मुण्डक के प्रथम खण्ड में पराविद्या का निरूपण है, द्वितीय खण्ड में अपरा विद्या की चर्चा है। द्वितीय मुण्डक के प्रथम खण्ड में  परापरात्मक ईश्वरीय देवसत्य का निरूपण है और द्वितीय खण्ड में ईश्वर को प्राप्त करने के उपाय को बतलाया गया है। तृतीय मुण्डक के प्रथम खण्ड में अपरा मुक्ति को बतलाने वाले  अक्षर का निरूपण एवं द्वितीय खण्ड में अव्यय से विशिष्ट अक्षर का निरूपण है।

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