Rishi Samman 2020

Rishi Samman

Rishi Samman 2020 was awarded to renowned  expert on Sanskrit grammar, Acharya Pushpa Dixit.                               

 

Shri Shankar Shikshayatan was honoured by renowned Sanskrit grammarian, Dr Pushpa Dixit, with her acceptance of Rishi Samman for 2020. The Shikshayatan has been presenting Rishi Samman to scholars who have dedicated their life in the promotion of Sanskrit. Speaking about her work, Dr Jwant Kumar Shastri said Acharya Dixit, with her profound knowledge and love for the language, had made Panini’s grammar popular among a wide circle of scholars and students. Her work, Mahasandhi, has crafted a new path of learning and understanding Sanskrit. Acharya Dixit was felicitated by well-known Sanskrit poet, Rewaprasad Dwivedi. Dr Mani Shankar Dwivedi read out the testimonial honouring Acharya Dixit. In her acceptance speech, Acharya Dixit said the award honoured Bhagwan Panini. She then presented a meaningful and inspiring essay on Sanskrit grammar.

Dr Pushpa Dixit retired as the Head of Department, Sanskrit, Government Girls Post-Graduate College, Bilaspur. She had completed her post graduate study in Sanskrit from Rani Durgavati University, Jabalpur. She studied Sanskrit grammar (Vyakarana) under famous Vyakarana Acharya Pandit Vishvanath Tripathi and since been involved full-time in the research and study of the Paniniya Vyakarana (Paninian grammar system) .She  lives in Bilaspur, Chattisgarh.

 

 

प्रख्यात वैयाकरण आचार्या पुष्पा दीक्षित को श्री शंकर शिक्षायतन ने वर्ष २०२० के  ऋषिसम्मान से सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर डॉ. ज्वन्त कुमार शास्त्री, प्रख्यात वैदिक ने  आचार्य पुष्पा दीक्षित के अभिनन्दन वक्तव्य में कहा कि आचार्य पुष्पा दीक्षित जी ने व्याकरण के शिक्षण को नवीन रूप से छोटे- छोटे बच्चों तक पहुँचाने का श्लाघनीय प्रयास किया है। पं. सत्यव्रत सामश्रमी जी ने अथक प्रयास करने के बाद मुग्धबोध, कालपतन्त्र और कातन्त्र ग्रन्थों का प्रचार प्रसार नहीं हो पाया। उस रिक्त कार्य को परमसम्माननीय आचार्य पुष्पा दीक्षित जी ने बड़े ही परिश्रम एवं मनोयोग से  पाणिनि व्याकरण को जनमानस में प्रचारित किया है। इसके लिए श्रीमती दीक्षित जी ऋषिसम्मान के सर्वथा पात्र हैं।

 

डॉ. ब्रजभूषण ओझा, व्याकरणविभागाध्यक्ष, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी ने कहा कि आचार्य पुष्पा दीक्षित जी को माता जी शब्द से हम सभी छात्रवृन्द पुकारते हैं।  आचार्य दीक्षित ने व्याकरण के अनेक ग्रन्थों के माध्यम से व्याकरण को सरलतया अध्यापन रीति से अवबोध्य बनाते हुए उसके प्रचार प्रसार में संलग्न हैं। महासन्धि नामक ग्रन्थ लिख कर एक इन्होंने एक नवीन पथ को उद्घाटित किया है।

 

आचार्य दीक्षित जी का अभिनन्दनपत्र का वाचन एवं प्रमाणपत्र का संगणकीय प्रस्तुतीकरण डॉ. मणि शंकर द्विवेदी, वरिष्ठ शोध अध्येता, श्री शंकर शिक्षायतन ने किया । 

 

संस्कृत जगत् के महाकवि रेवाप्रसाद द्विवेदी जी ने आचार्य पुष्पा दीक्षित जी को अपने आशीर्वचन से प्रशंसित किया। प्रो. सन्तोष कुमार शुक्ल, समन्वयक, श्री शंकर शिक्षायतन ने कहा कि आचार्य दीक्षित ने ऋषिसम्मान को ग्रहण कर के श्री शंकर शिक्षायतन को उपकृत किया हैं। आचार्या पुष्पा दीक्षित जी का समग्र जीवन संस्कृत सेवा के लिए सर्वतोभावेन समर्पित है।

 

ऋषिसम्मान को स्वीकृत करते करते हुए अपने उद्बोधन में आचार्या पुष्पा दीक्षित ने कहा कि यह ऋषि सम्मान मेरा सम्मान नहीं बल्कि यह भगवान् पाणिनि का सम्मान है। उन्होंने व्याकरणविषयक एक सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया।  उन्होंने कहा कि अष्टाध्यायी और महाभाष्य का क्रम संस्कृत भाषा शिक्षण एवं पदसाधनिका में उपयोगी नहीं है। कौमुदी भाषाशिक्षण एवं पदसाधनिका दोनों में उपयुक्त है। परन्तु कौमुदी को भी एक छात्र के अधिगम की दृष्टि से सार्वधातुक एवं आर्धधातुक को अलग-अलग समझने से कौमुदी की पद्धति की तुलना में यह सुगम है।