Shatpatha Brahmana

Shatpatha Brahmana has 100 chapters. This volume contains a comprehensive explanation of Yajurveda. Yajurveda, in conventional terms, is one of the four Vedas. In terms of tatva or essence, it is yajjurveda. There are two words in it--yath and ju. These refer to prana (life-force), vayu (air), gathi (movement) and vak (speech). Shastriji's elucidation of Shatpath Brahmana in Hindi offers insight into various aspects of Yajurveda.

 

 

 

 

साधारणतया  लौकिक दृष्टि से ‘यजुर्वेद’ और तत्त्वदृष्टि से ‘यज्जूर्वेद’ है । इस में दो पद हैं-यत् और जूः। जिसका क्रमशः अर्थ  प्राण, वायु,गति और वाक्, आकाश स्थिति है ।

शतपथब्राह्मण में एक सौ अध्याय हैं । इस के कारण इसका नाम शतपथ है। यजुःसंहिता के व्याख्यारूप यजुर्ब्राह्मण है । जिसके शाखा भेद से एक सौ एक विभाग माने गये हैं। इनमें 15 शाखाएँ ‍‘शुक्लयजुर्वेद’ नाम से प्रसिद्ध हैं और 86 शाखाएँ ‘कृष्णयजुर्वेद’ नाम से व्यवहृत होते हैं । सामान्यतया शुक्लयजुर्वेद की ‘माध्यन्दिनशाखा’ और काण्वशाखा ही उपलब्ध होता है । पण्डित मोतीलाल शास्त्री के अनुसार संहितावेद ‘मन्त्रवेद’ और विधि, आरण्यक तथा उपनिषद् के भेद से विभक्त वेदसमष्टि ही ‘ब्राह्मणवेद’ है । शतपथब्राह्मण के 14 काण्डों में 13 काण्ड केवल ‘विधि’ का विश्लेषण करते हैं। 14 वां काण्ड आरण्यक और उपनिषद् इन दोनों का संग्रह है।

माध्यन्दिन और काण्व ये दोनों सम्प्रदाय प्रवर्तक आचार्य हैं । इन दोनों शाखाओं का नाम वाजसनेयी है । वाजसनेय याज्ञवल्क्य का ही दूसरा नाम है, क्योंकि सम्पूर्ण शुक्लयजुर्वेद के आचार्य  याज्ञवल्क्य हैं ।

पण्डित मोतीलाल शास्त्री ने शतपथब्राह्मण पर हिन्दी विज्ञानभाष्य की रचना की है। 

शतपथब्राह्मण प्रथम काण्ड--प्रथमखंड     (Shatpatha Brahmana first part of  Part I)---download
शतपथब्राह्मणद्वितीय काण्ड-- प्रथमखंड     (Shatpatha Brahmana second part of  Part I)--download
शतपथब्राह्मण तृतीय  काण्ड--प्रथमखंड   (Shatpatha Brahmana third part of Part I) --download
शतपथब्राह्मण प्रथम काण्ड--चतुर्थ खंड    (Shatpatha Brahmana first part of Part IV)--download
शतपथब्राह्मण द्वितीय काण्ड--चतुर्थ खंड    (Shatpatha Brahmana second part of Part IV)--download 
शतपथब्राह्मण तृतीय  काण्ड--द्वितीय खंड  (Shatpatha Brahmana third part of Part II)--download