Vijnanavidyut

The term `vidyut` means illumination. As everything becomes clear in the glare of a lightening in the sky, reading this volume will enable a reader to understand Brahma vijnana easily. Both the original Sanskrit edition and its Hindi translation by Pandit Shivdutt Sharma Chaturvedi are given here.

 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                               

विज्ञानविद्युत् में षष्ठी समास हुआ है- विज्ञानस्य विद्युत् विज्ञानविद्युत्। विद्युत् का अर्थ चमक होता है। जिस प्रकार आकाश में विद्युत् चमकने पर उसके प्रकाश से वस्तु का ज्ञान तुरन्त हो जाता है उसी प्रकार इस ग्रन्थ को पढ़ने से ब्रह्मविज्ञान का बोध सहजता से हो जाता है। इसीलिए इस ग्रन्थ का अध्याय विभाजक शब्द प्रकाश रखा गया है। ग्रन्थकार ने कहा है कि वेद मार्ग में विचरण करने वालों के लिए विज्ञान रूपी विद्युत् का प्रकाश अज्ञान के अन्धकार को नष्ट करता हुआ क्षण भर के लिए भी सुख प्रदान करने वाला होगा।

                                               विज्ञानविद्युत्संचारादज्ञानतिमिरात्ययः।

                                               क्षणिकोऽपि सुखाय स्याद् वेदमार्गे विचारिणाम्॥

गहन ब्रहमविज्ञान शास्त्र में प्रवेश कराने के लिए उपकार पहुँचाने वाला विज्ञानरूपी विद्युत् का यह प्रकाश किस के लिए सुखकारक नहीं होगा। अर्थात् सभी के लिए सुखकारक है।

                                              गहने ब्रह्मविज्ञाने प्रवेशायोपकारक:।

                                              विज्ञानविद्युदुद्योतः कस्य न स्यात् सुखावहः॥

यह ब्रह्मविज्ञान का एक प्रकरण ग्रन्थ। इसको पढ़ने से ब्रह्मविज्ञान के सिद्धान्त का परिचय सरलता से हो जाता है। इस ग्रन्थ के प्रथम प्रकाश में चतुष्पाद ब्रह्म का निरूपण किया गया है । इसके अन्तर्गत पुर, पुरुष, परात्पर एवं निर्विशेष का वर्णन है। द्वितीय प्रकाश में क्षरपुरुष, अक्षरपुरुष और अव्ययपुरुष का वर्णन है। तृतीय प्रकाश में स्वयम्भूर्ब्रह्मा, परमेष्ठी विष्णु, सूर्य, सोम आदि विषयों का वर्णन है। चतुर्थ प्रकाश में आधिभौतिकनिरुक्ति, आध्यात्मिकनिरुक्ति, चिदात्मा, शान्तात्मा, महानात्मा, विज्ञानात्मा, प्रज्ञानात्मा, भूतात्मा, हंसात्मा, कर्मात्मा आदि विषयों का समावेश किया गया है। पञ्चम प्रकाश में पुरुषत्रय का, परात्पर और पुरुष में परस्पर भेद, पुरुष का सृष्टि में कारणता आदि विषयों को समाहित किया गया है।

इस ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद शिवदत्त शर्मा चतुर्वेदी ने किया है तथा राजस्थान पत्रिका प्रकाशन से प्रकाशित है।

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