Event Reports

December 29,2023

National Seminar on Sharirikavimarsha Part IX

The ninth seminar on Pandit Madhusudan Ojha’s Sharirikavimarsha, an exceptional work on Brahma vijnana, was organised by Shri Shankar Shikshayatan on December 29, 2023. The meeting focused on the 16th chapter of the book, Jeevatmapratipatti. The meeting was chaired by Professor Santosh Kumar Shukla of Jawaharlal Nehru University, New Delhi. Read full report

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-9) 

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक २९ दिसम्बर २०२३ को शारीरकविमर्श नामक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया । पं. मधुसूदन ओझा प्रणीत शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ के ‘जीवात्मप्रतिपत्ति’
नामक १६ वें प्रकरण को आधार बना कर यह संगोष्ठी समायोजित हुई थी । ओझाजी ने इस प्रकरण में जीवात्मविषयक विविध विषयों को उपस्थापित किया है जिनमें शारीरक जीवात्मा प्रत्यगात्मा, चिदात्मा, चिदंश एवं चिदाभास आदि पर विस्तार से प्रतिपादन किया गया है। पूर्ण विवरण यहाँ पढ़े

November 30,2023

National Seminar on Sharirikavimarsha Part VIII

The eighth seminar on Pandit Madhusudan Ojha’s Sharirikavimarsha, an exceptional work on Brahma vijnana, was organised by Shri Shankar Shikshayatan on November 30, 2023. The meeting focused on the 15th chapter of the book. There are in total 16 chapters. The meeting was chaired by Professor Santosh Kumar Shukla of Jawaharlal Nehru University, New Delhi. Read full report

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-8) 

श्रीशंकर शंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक ३० नवम्बर २०२३ को शारीरकविमर्श नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया। पं. मधुसूिन ओझा प्रणीत शारीरकशवमशशके १५वें प्रकरण को आधार बना कर यह संगोष्ठी समायोशजत हुई थी । इस प्रकरण में २७ शीर्षकों के माध्यम से ईश्वर का विस्तार से निरूपण किया गया है। ओझाजी ने इस प्रकरण में ईश्वर विषयक विविध वैदिक सन्दर्भों को उद्धृत करते हुए विविध आयामों से ईश्वर के विषय में विमर्श किया है।। पूर्ण विवरण यहाँ पढ़े

October 31, 2023

National Seminar on Sharirikavimarsha Part VII

The seventh seminar on Pandit Madhusudan Ojha’s Sharirikavimarsha, an exceptional work on Brahma vijnana, was organised by Shri Shankar Shikshayatan on October 31, 2023. The meeting focused on the 14 the chapter of the book. There are in total 16 chapters. The meeting was chaired by Professor Santosh Kumar Shukla of Jawaharlal Nehru University, New Delhi. Read the full report

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-7) 

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक ३१ अक्टूबर २०२३ को शारीरकविमर्श विषयक एक ऑनलाईन राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया । पण्डित मधुसूदन ओझा प्रणीत ब्रह्मविज्ञान सिद्धान्त शृंखला के अन्तर्गत आने वाले शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ में कुल सोलह प्रकरण हैं। इस ग्रन्थ के १४ वें प्रकरण को आधार बना कर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी सुसंपन्न हुई।। पूर्ण विवरण यहाँ पढ़े

September 30,2023

National Seminar on Sharirikavimarsha Part VI

Shri Shankar Shikshayatan organised a National Seminar on Sharirikavimarsha on September 30,2023. It was the sixth seminar in the series on Pandit Madhusudan Ojha's Sharirikavimarsha. The seminar focused on the 13th chapter of the book. In this chapter, atma's seven forms are explained. These forms are--nirvishesh, paratpar, purusha, satya, yajna, virat and vishwa. Read full report

३० सितम्बर २०२३

शारीरकविमर्श (भाग-६)

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा समायोजित शारीरकविमर्श (भाग-६)
नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन ३० सितम्बर २०२३ को सायंकाल अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया ।
यह संगोष्ठी पं. मधुसूदन ओझा प्रणीत शारीरकविमर्श नमक ग्रन्थ के १३वें प्रकरण को आधार बना कर
समायोजित हुई थी । आगे पढ़े

National Seminar on Sharirikavimarsha Part V

The fifth seminar on Pandit Madhusudan Ojha’s Sharirikavimarsha, an exceptional work on Brahma vijnana, was organised by Shri Shankar Shikshayatan on August 29, 2023. The present seminar focused on the twelfth chapter, Atmabrahmamimamsa. The meeting was chaired by Professor Santosh Kumar Shukla of Jawaharlal Nehru University, New Delhi.

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-५)

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक २९ अगस्त २०२३ को शारीरकविमर्श विषयक एक ऑनलाईन राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया । पण्डित मधुसूदन ओझा प्रणीत ब्रह्मविज्ञान सिद्धान्त शृंखला के अन्तर्गत आने वाले शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ में कुल सोलह प्रकरण हैं। यह संगोष्ठी इस ग्रन्थ के ‘आत्मब्रह्ममीमांसा’ नामक १२ वें प्रकरण को आधार बनाकर समायोजित थी। आगे पढ़े

July 31, 2023

National symposium:Sharirikavimarsha Part IV

The fourth seminar on Pandit Madhusudan Ojha’s Sharirikavimarsha, an exceptional work on Brahma vijnana, was organised by Shri Shankar Shikshayatan on July 31, 2023. The present seminar focussed on eighth, tenth and twelfth chapters of the text. Read Full Text

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-४)

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक ३१ जुलाई २०२३ को शारीरकविमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया । पण्डित मधुसूदन ओझा जी के ब्रह्मविज्ञान सिद्धान्त शृंखला के अन्तर्गत शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ आता है। इस ग्रन्थ में सोलह प्रकरण हैं। यह संगोष्ठी इस ग्रन्थ के आठवें, दसवें एवं बारहवें अधिकरण के आलोक में समायोजित थी। शारीरकविमर्श के इन्हीं प्रकरणों में वर्णित विषय को आधार बनाकर पर सभी वक्ता विद्वानों ने व्याख्यान प्रस्तुत किया ।हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

June 30,2023

On June 30, 2023, Shri Shankar Shikshayatan organised the national seminar on Sharirikavimarsha. This was the third meeting on Sharirikavimarsha. The meeting focused on the seventh chapter of the book on Brahmavijnana authored by Pandit Madhusudan Ojha.The main speaker was Prof. Kamlakant Tripathi of Sampoornanand Sanskrit University, Varanasi. Other speaker was Dr Kuldeep Kumar of Himachal Pradesh Central University. The meeting was chaired by Prof. Santosh Kumar Shukla, Centre for Sanskrit and Indic Studies, Jawaharlal Nehru University and convener, Shri Shankar Shikshayatan. Read Full Report

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श (भाग-३)

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा दिनांक ३० जून २०२३ को
शारीरकविमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया।
यह संगोष्ठी पं. मधुसूदन ओझा प्रणीत शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ के सप्तम प्रकरण को
आधार बनाकर समायोजित की गयी थी। जिसमें संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
के मीमांसा विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी ने विशिष्ट वक्ता के रूप में तथा हिमाचल
प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग के सहायक आचार्य
डॉ. कुलदीप कुमार ने वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया । यह संगोष्ठी श्रीशंकर शिक्षायतन के
समन्वयक तथा संस्कृत एवं प्राच्य अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. सन्तोष कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

May 30,2023

National Seminar on Sharirikavimarsha

Shri Shankar Shikshayatan organised a National Seminar on Sharirikavimarsha on May 30, 2023. This is the fourth seminar in the series of discussions organised on Brahmavijnana. The main speaker is Prof. K I Dharanidharan, Pondicherry University. Other speakers were: Prof. K. Ganapati Bhatt, Central Sanskrit University, Tirupati, Dr Ramachandra Sharma, Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit University, Delhi, and Dr Devendra Kumar Mishra, Indira Gandhi National Open University. The Meeting was chaired by Prof. Santosh Kumar Shukla, Jawaharlal Nehru University, Delhi and Managing Trustee, Shri Shankar Shikshayatan. Full report

राष्ट्रीय संगोष्ठी शारीरकविमर्श

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा ब्रह्मविज्ञानविमर्श शृंखला के अन्तर्गत दिनांक ३० मई २०२३ को शारीरकविमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया। यह संगोष्ठी पण्डित मधुसूदन ओझा प्रणीत शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ के चार प्रकरणों को आधार बनाकर समायोजित थी। जिसमें पाण्डिचेरी विश्वविद्यालय, पाण्डिचेरी के संस्कृत विभाग के आचार्य. प्रो. के. ई. धरणीधरण ने मुख्य वक्ता के रूप में तथा अन्य वक्ताओं में प्रो. के. गणपति भट्ट, आचार्य, अद्वैतवेदान्त विभाग, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, डॉ. रामचन्द्र शर्मा, सह आचार्य, न्यायविभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वद्यालय, नई दिल्ली तथा डॉ. देवेश कुमार मिश्र, सह आचार्य, संस्कृत विभाग, इन्दिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने व्याख्यान प्रस्तुत किया।हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

April 29,2023

National Seminar on Brahmavijnana-Sharirikavimarsha

Shri Shankar Shikshayatan, under the series of Brahmavijnana-vimarsha, organised a national seminar on Sharirikavimarsha on April 29,2023. The seminar was based on the Pandit Madhusudan Ojha’s unique text, Sharirakavimarsha. Prof. Dr. Satchidananda Mishra, Member Secretary, Indian Council of Philosophical Research, New Delhi, served as the keynote speaker and Prof. Devnath Tripathi was the distinguished speaker. The programme was chaired by Prof. Santosh Kumar Shukla, convener, Shri Shankar Shikshayatan.

राष्ट्रीय संगोष्ठी : शारीरकविमर्श

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा ब्रह्मविज्ञानविमर्श शृंखला के अन्तर्गत दिनांक २९ अप्रैल २०२३ को शारीरकविमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन अन्तर्जालीय माध्यम से किया गया। यह संगोष्ठी पण्डित मधुसूदन ओझा प्रणीत शारीरकविमर्श नामक ग्रन्थ पर आधारित थी। जिसमें भारतीय दार्शनिक अनुसन्धान परिषद्, नई दिल्ली के सदस्य
सचिव प्रो. सच्चिदानन्द मिश्र ने मुख्य वक्ता के रूप में तथा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पुणे के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. देवनाथ त्रिपाठी ने विशिष्ट वक्ता के रूप में व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीशंकर शिक्षायतन के समन्वयक तथा संस्कृत एवं प्राच्य अध्ययन संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. सन्तोष कुमार शुक्ल ने किया । हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

March 30,2023

National Seminar on Brahmavijnana-paratpartatva

Shri Shankar Shikshayatan organised the second seminar under the Brahmavijnana series with Paratpartatva as the focus. Paratpar means the supreme being. Brahmasamanvya is a well known book written by Pandit Madhusudan Ojha. Partpartatva is the second chapter. The first chapter is nirvishesha tatva and the seminar was organised on February 28,2023. The mains speaker at the seminar was  Prof. Satish K. S. Chairman, Department of Advaita Vedanta, Rashtriya Sanskrit University, Tirupati. Other speakers were Prof. Ganesh Ishwar Bhatt, Acharya, Department of Vedanta, central Sanskrit University, Sringeri campus and Prof. Mayuri Bhatia, Acharya, Department of Sanskrit, Gujarat University, Ahmedabad. The programme was chaired by Prof. Dr. Mahananda Jha, Chairman, Department of Justice, Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit University, New Delhi. Read full report

राष्ट्रीयसंगोष्ठी : परात्परतत्त्वविमर्श

यह संगोष्ठी पण्डित मधुसूदन ओझा प्रणीत ब्रह्मसमन्वय नामक ग्रन्थ के दूसरे अनुवाक में वर्णित परात्पर तत्त्व को आधार बनाकर समायोजित की गयी थी। इस संगोष्ठी में वक्ता के रूप मे प्रो. सतीश के. एस. अध्यक्ष, अद्वैत वेदान्त विभाग, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, प्रो. गणेश ईश्वर भट्ट, आचार्य, वेदान्त विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, शृंगेरी परिसर तथा प्रो. मयूरी भाटिया, आचार्य, संस्कृत विभाग, गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद ने निर्धारित विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. महानन्द झा, अध्यक्ष, न्याय विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने की।आगे पढ़े

National Seminar on Kadambini

Shri Shankar Shikshayatan in collaboration with the Department of Vastushastra, Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit University, Delhi, organised a seminar on Kadambini on March 18,2023. Kadambini is an important work on srishti vijnana by Pandit Madhusudan Ojha. The book gives a comprehensive account of the monsoon and its various facets. The meeting was introduced by Prof. Santosh Kumar Shukla, convener of Shri Shankar Shikshayatan and head of the department, Sanskrit and Ancient Studies, Jawaharlal Nehru University. Notable speakers included Prof. Ramachandra Pandey, former chair, jyotish department, Banaras Hindu University, Prof. Devi Prasad Tripathi, head of Vastu Shastra department, Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit University and Prof Manoj Srivastava, Banaras Hindu University. Read full report

कादम्बिनी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

श्री शंकर शिक्षायतन ने वास्तु शास्त्र विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के सहयोग से 18 मार्च, 2023 को कादंबिनी पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया । कादम्बिनी पंडित मधुसूदन ओझा द्वारा सृष्टि विज्ञान पर एक महत्वपूर्ण कार्य है । पुस्तक वृष्टि विज्ञानऔर इसके विभिन्न पहलुओं का एक व्यापक विवरण देती है । बैठक की शुरुआत श्री शंकर शिक्षण संस्थान के संयोजक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रो. संतोष कुमार शुक्ला ने की । उल्लेखनीय वक्ताओं में प्रो । रामचंद्र पांडे, पूर्व अध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी, वास्तु शास्त्र विभाग के प्रमुख, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और प्रो. मनोज श्रीवास्तव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय।आगे पढ़े

February 28,2023

National Seminar on Brahmavijnana-nirvishesha tatva

Shri Shankar Shikshayatan organised the first seminar in the Brahma Vijnana series on February 28,2023. The topic of the discussion was nirvishesha tatva. The meeting was chaired by the Shikshayatan convener and professor at Sanskrit and Indic Studies department, Jawaharlal Nehru University, Prof. Santosh Kumar Shukla. The main speaker was Prof. Dhananjay Kumar Pandey of Kashi Hindu University, Varanasi. Other speakers included Dr Umesh Chandra Mishra, Central Sanskrit University, Guruvayur, Kerala, Dr Arun Kumar Mishra of Uttarakhand University and  Dr Rajiv Lochan Sharma of Kumar Bhaskar Varma Sanskrit and Ancient Studies University, Assam. Read full report

राष्ट्रीय संगोष्ठी ब्रह्मविज्ञान-निर्विशेषतत्त्व

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा दिनांक २८  फरवरी २०२३ को  ब्रह्मविज्ञान शृंखला के अन्तर्गत निर्विशेषतत्त्वविमर्श नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी का ऑनलाईन समायोजन किया गया। यह संगोष्ठी श्रीशंकर शिक्षायतन के समन्वयक तथा संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. सन्तोष कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. धनञ्जय कुमार पाण्डेय, आचार्य, वेदान्त विभाग, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने तथा वक्ता के रूप में डॉ. उमेश चन्द्र मिश्र, विभागाध्यक्ष, व्याकरण विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गुरुवायुर परिसर, केरल, डॉ. अरुण कुमार मिश्र, सहायक आचार्य, वेद विभाग, उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, हरिद्वार एवं डॉ. राजीव लोचन शर्मा, सहायक आचार्य, पारम्परिक संस्कृत विभाग, कुमार भस्कर वर्मा संस्कृत पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय, असम ने व्याख्यान दिया। हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

February 7-13, 2023

Seven-day workshop on Varna-samiksha

Shri Shankar Shikshayatan organised a seven-day workshop on Varna-samiksha from February 7.2023. Varna-samiksha is a book of grammar and usage written by Pandit Madhusudan Ojha. The workshop was organised around seven themes and each theme was discussed by different experts. The workshop was conceived and conducted by Prof. Santosh Kumar Shukla, convener, Shri Shankar Shikshayatan and faculty member of School of Sanskrit and Indic Studies. Jawaharlal Nehru University, New Delhi.

The themes and speakers were–matrika-vivechan–Prof. Om Nath Vimali, Delhi University; varna ka swarup–Prof. Bhagawat Charan Shukla, Kashi Hindu Vishwavidyalaya, Benares, ranga-vivechan–Prof. Jaishankar Lal Tripathi,Kashi, Hindu Vishwavidyalaya, Benares, svar vimarsh–Dr Dayal Singh Panwar, vag-vijnana vichar–Dr Kuldeep Kumar, Himachal Pradesh Central University, Dharamshala, Himachal Pradesh,anantar-vidh --Dr Yaduvir Svarup Shastri of 

Kameshwar Singh Darbhanga Sanskrit University, Darbhanga, Bihar and vakya-prayog ka swarup–Dr Ramachandra of Kurukshetra University. 

In the first lecture, Dr Ramachandra spoke about the forms of sentence usage. He said four elements were essential for using any language--varna, akshara, pada and vakya. The journey then concludes at maha-vakya. 

On the second day, the talk was on vag-vijnana by Dr Kuldeep Kumar. The essential element of vak is prana. He said it was prana from which the entire creation came into being. The entire creation is established in prana and in dissolution merges into prana. Prana is rishi. From rishi tatva is born pitr and from pitr devata and asura are created. From devatas emerged the visible universe. 

On the third day, Dr Yaduvir Svarup Shastri spoke on anantar-vidhi. Anantar means limitless or without any obstruction--how two meaningful words can join seamlessly. When two words join to create a new expression, the process is called anantar. He spoke on the various aspects of such words and expressions.

Chairing the session, Dr Pramod Kumar Sharma of Jawaharlal Nehru University, said Varna-samiksha was a complex work and should form part of syllabus in colleges and universities. He explained that svarith svar were of two types--nitya and naimitia, constant and inconsistent. 

On the fourth day, the subject was swara. Speaking on the subject, Dr Dayal Singh Panwar explained that there were nine types of svara or sound or vowel.These are: shvasa-lakshan, nada-lakshan, vivara-lakshan, sthana-lakshan, vyakti-lakshan, geha-lakshan, sruti-lakshan, savan-lakshan and bhaga-lakshan. On the fifth day, Dr Shailesh Kumar Tiwari spoke on ranga-vivechan. There are eight types of rang or colour, of which the speaker explained in detail ranga, hunkar, nada, antastah and ushma. He referred to Pandit Madhusudan Ojha’s definition of ranga. When we strike a copper vessel with a finger, we hear a particular sound.On the sixth day, Prof. Rajdhar Mishra spoke on the forms of varna. These are vivarti, svarabhakti, anukswar and yama. On the concluding session, Dr Pankaj Kumar Vyas spoke on matrikas and explained there were five types of matrikas--brahma-matrika, akshama-matrika, rudra-matrika, bhuta-matrika and yavana-matrika. 

The workshop was attended by scholars and students from different universities and educational institutions. The workshop was managed by Dr Mani Shankar Dwivedi, Dr Lakshmi Kant Vimal and Dr Bishnu Shankar Mahapatra of Shri Shankar Shikshayatan.

सप्तदिवसीय राष्ट्रीय वर्णसमीक्षा-कार्यशाला

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा दिनांक ७-१३ फरवरी २०२३ तक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय वर्णसमीक्षा-कार्यशाला का समायोजन किया गया । पण्डित मधुसूदन ओझा द्वारा प्रणीत वर्णसमीक्षा एक भाषाशास्त्रीय ग्रन्थ है। इसमें भाषा के विविध पक्षों को समाहित किया गया है। संस्कृत वर्णमाला संबन्धी विवेचन वर्णमातृका नामक शीर्षक में किया गया है। वर्णों के उच्चारण के नियम के अन्तर्गत अयोगवाह के ९ भेदों को स्पष्टता से वर्णन किया गया है । जिसमें रंग और यम आदि विषयों के साथ-साथ वैदिक स्वरूप के नियमों पर विस्तृत चर्चा की गयी है। इस कार्यशाला में वर्णसमीक्षा ग्रन्थ के एक-एक विषयों को आधार बना कर विविध विद्वानों द्वारा इन विषयों का विवेचन किया गया। सभी विषय उद्घाटक विद्वानों ने विस्तार से एक एक तत्त्व का अपने व्याख्यान द्वारा स्पष्टता से प्रतिपादन किया। हिंदी में रिपोर्ट पढ़ें

January 31, 2023

National Seminar on Brahmavijnana-Vijnana-vidyut and Rishi Samman

Shri Shankar Shikshayatan organised a national seminar on Pandit Madhusudan Ojha's book, Vijnana-vidyut on January 31, 2023. The book is an important work on Brahma vijnana. The term `vidyut` means illumination. As everything becomes clear in the glare of a lightening in the sky, reading this volume will enable a reader to understand Brahma vijnana easily. The event also witnessed the presentation of Rishi Samman posthumously to  Acharya Manu Dev Bhattacharya. He passed away in 2020.

December 30,2022

National seminar on Srimad Bhagavada Gita vijnana-bhashya

Shri Shankar Shikshayatan organised a national seminar on Srimad Bhagavada Gita vijnana-bhashya on December 30,2022. Pandit Madhusudan Ojha’s Srimad Bhagavada Gita-vijnana Bhashya. The volume is divided into four chapters–rahasya khanda, moola khanda, acharya khanda and hridaya khanda. In Rahasya Khanda, there is vivid description of rajarshi vidya. Pandit Motilal Shastrij has authored three small volumes on rajarshi vidya. In each of these volumes, there are seven upadeshas. The present seminar focused on these three volumes. Read report

राष्ट्रीय संगोष्ठी –श्रीमद्भगवद्गीताविज्ञानभाष्यविमर्श

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा दिनांक ३० दिसम्बर २०२२ को श्रीमद्भगवद्गीताविज्ञानभाष्यविमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया। पं. मधुसूदन ओझा प्रणीत श्रीमद्भगवद्गीताविज्ञानभाष्य चार भागों में विभक्त है। इनके नाम हैं- रहस्यकाण्ड, मूलकाण्ड, आचार्यकाण्ड और हृदयकाण्ड । उन में रहस्यकाण्ड के अन्तर्गत राजर्षिविद्या का वर्णन प्राप्त होता है। पण्डित मोतीलाल शास्त्री जी ने हिन्दी में राजर्षिविद्या पर तीन लघु ग्रन्थ प्रस्तुत किया है। प्रत्येक ग्रन्थ में सात-सात उपदेश हैं। इन्हीं तीन ग्रन्थों को आधार बनाकर पर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी समायोजित की गयी थी। आगे पढ़े

November 26,2022

Gitavijnanabhashya-Gitavishaya rahasya

A National Seminar was organised on November 26,2022, in collaboration with Dr Shyama Prasad Mukherjee University, Ranchi, on Gita-vishaya-rahasya. Pandit Madhusudan Ojha’s ommentaries on Bhagavad Gita are divided into four sections–rahasya khanda, sheershaka khanda, acharya khanda and hridaya khanda. In rahasya khanda, he has detailed Gita-nama-rahasya, Gita-shastra-rahasya and Gita-vishaya-rahasya. The national seminar focused on Gita-vishaya-rahasya Read report

राष्ट्रीय संगोष्ठी –गीताविज्ञानभाष्य-गीताविषयरहस्य

श्री शंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान द्वारा संस्कृत विभाग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक २६ नवम्बर २०२२ को गीताविज्ञानभाष्य-गीताविषयरहस्यविमर्श विषयक अन्तर्जालीय राष्ट्रीय संगोष्ठी समायोजित की गयी । पं. मधुसूदन ओझा ने गीताविज्ञानभाष्य के रहस्यकाण्ड के अन्तर्गत गीतानामरहस्य, गीताशास्त्ररहस्य एवं गीताविषयरहस्य नामक तीन विषयों का विस्तार से प्रतिपादन किया है। आगे पढ़े

October 30,2022

National Seminar on Gitavijnanabhashya-Gitashastra rahasya

Pandit Madhusudan Ojha’s commentaries on Bhagavad Gita are divided into four sections–rahasya khanda, sheershaka khanda, acharya khanda and hridaya khanda. In rahasya khanda, he has detailed Gita-nama-rahasya, Gita-shastra-rahasya and Gita-vishaya-rahasya. The national seminar focused on Gita-shastra-rahasya.  Read full report

गीताविज्ञानभाष्य-गीताशास्त्ररहस्यविमर्श

श्रीशंकर शिक्षायतन वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा दिनांक ३० अक्टूबर २०२२ को गीताविज्ञानभाष्य-गीताशास्त्ररहस्यविमर्श विषयक अन्तर्जालीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया। विद्यावाचस्पति पण्डित मधुसुदन ओझा ने श्रीमद्भगवद्गीता पर चार काण्डों में विज्ञानभाष्य का प्रणयन किया है। विज्ञानभाष्य के चार काण्ड हैं- रहस्यकाण्ड, शीर्षककाण्ड, आचार्यकाण्ड एवं हृदयकाण्ड। रहस्यकाण्ड के अन्तर्गत गीतानामरहस्य, गीताशास्त्ररहस्य और गीताविषयरहस्य ये तीन विषय वर्णित हैं। इनमें से गीताशास्त्ररहस्य को आधार बना कर यह संगोष्ठी समायोजित की गयी थी। आगे पढ़े

September 28, 2021

Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture 2021

Kadambini
Dr Devi Prasad Tripathi

Pandit Madhusudan Ojha’s Kadambini illuminated the vedic science of forecasting rain, said Dr Devi Prasad Tripathi, Chancellor, Uttarakhand Sanskrit University, during his comprehensive presentation on the subject at Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture 2021 organised by Shri Shankar Shikshayatan on September 28,2021.

Dr Tripathi, a well known expert on jyotish vidya, recalled the extraordinary work done by Ojhaji on rediscovering vedic terms, unraveling the meaning of many of the terms which were lost in time and creating an invigorating body of work on vedic science. His work on forecasting rain, Kadambini, was but one of the many volumes Ojhaji had written on various facets of nature and Creation. Read more

May 29, 2021

National Webinar on Sadasadavada

Sadasadavada is one of the several books authored by renowned Vedic teacher Pandit Madhusudan Ojha on Creation. In this book, Ojhaji has presented 21 philosophical issues. Although in essence there are only seven basic philosophical issues--pratyaya, prakriti, tadamya, arya, guna, samanjasya and akshara, but with the presence of sat (truth), asat (what is not truth) and satsat in each of these make the total to 21. Read more

April 30, 2021

National Webinar on Avaranavada

Shri Shankar Shikshayatan organised a national webinar on Pandit Madhusudan Ojha’s Avaranvada on April 30, 2021.Avaranvada is one of the ten books authored by renowned Vedic scholar Pandit Madhusudan Ojha, examining various causes of Creation. Inspired by nasadiya-sukta of the Rigveda, Ojhaji explored brahman-granthas, aranyakas and other vedic texts to understand how the Creation came about. Read more

Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture 2019

September 28,2019

Madhusudan Ojha’s Philosophy of One and Many

Prof. V.N.Jha

Pandit Madhusudan Ojha had dedicated much of his life to reflect on the creation of universe.                  Prof. V.N.Jha, speaking at the Pandit Motilal Shastri Memorial Lecture on September 28, 2019 at New Delhi, said it was but natural that man had this extraordinary curiosity to know about creation since time immemorial.  When  Ojhaji, in pursuit of this curiosity,  looked at the Vedic period, he found several suktas, all trying to explain  the origin of this universe. He found that everyone was claiming to know the reality. But what is the reality? What is sat? What is the truth? He could see that there were multiple positions. He wrote ten books on the subjects, including Sanshayatachudavada which examined all the doubts and differences. Read transcript

September 28,2008
Centenary Year of Veda Vachaspati Pandit Motilal Shastri Seminar on Veda Vijnana

Opening Remarks by Rishi Kumar Mishra

For a seminar to mark the centenary year of Veda Vachaspati Pandit Motilal ji Shastri; Veda Vijnana is the most appropriate topic. Because Shastri ji and his Sameeksha Chakravarty guru Pandit Madhusudan Ojha ji are pioneers in the exposition and elucidation of Veda Vijnana – a term generally translated in English as Vedic Science. However, several issues arise from the use of the term 'science' for Vijnana. Some well-meaning scholars of the Vedas have attempted to 'prove' that the Western achievements of modern science are nothing new. That several modern scientific invention/can be located within Vedic texts.
But this is not what Ojha ji and Shastri ji tell us. The Vijnana of the Vedas expounded in their works is vastly different from modern western science. Read the full text