National Seminar on Rajarshividya

rajarshividya

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Pandit Motilal Shastri's Gitavijnana-bhashya gives a vivid description of four vidyas--rajarshividya, sidhavidya, arshavidya and rajavidya. Rajarshividya contains 50 upadesha from seven upanishads. In the third chapter of Bhagavad Gita,the first 32 shlokas contain seven upadeshas. These upadeshas were the focus of the discussion.  

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श्रीशंकर शिक्षायतन (वैदिक शोध संस्थान), नई दिल्ली एवं संस्कृत विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक ३० अप्रैल २०२२ को सायं ४-८ बजे तक राजर्षिविद्याविमर्श विषयक अन्तर्जालीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समायोजन किया गया। यह संगोष्ठी पं. मोतीलाल शास्त्री प्रणीत गीताविज्ञानभाष्य के अन्तर्गत प्रतिपादित राजर्षिविद्या के तृतीय उपदेश को आधार बनाकर समायोजित की गयी थी। ध्यातव्य है कि गीताविज्ञानभाष्य के अन्तर्गत चार विद्याओं का वर्णन प्राप्त होता है-राजर्षिविद्या, सिद्धविद्या, आर्षविद्या एवं राजविद्या।  राजर्षिविद्या के अन्तर्गत सात उपनिषदों में निहित कुल ५० उपदेशों को समाहित किया गया है। राजर्षिविद्या के तृतीय उपनिषद् के अन्तर्गत गीता के तृतीय अध्याय के प्रारम्भिक ३२ श्लोकों को कुल सात उपदेशों में विभक्त कर उनका विवेचन किया गया है। इन्हीं सात उपदेशों को केन्द्र में रखकर इस संगोष्ठी के वक्ताओं ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। Read Full Report