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सात-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला- ‘पितृसमीक्षा’

जून 15–21, 2026

हमें आपको ‘पितृसमीक्षा’ पर हमारी सात-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है, जो 15 जून से शुरू होकर 21 जून, 2026 को समाप्त होगी।

‘पितृसमीक्षा’ पंडित मधुसूदन ओझा द्वारा लिखी गई है। ‘पितृ’ शब्द का अर्थ है पूर्वज। पंडित मधुसूदन ओझा ने पूर्वजों के विषय पर एक विस्तृत पुस्तक लिखी है। पुस्तक की शुरुआत वैदिक विज्ञान के सैद्धांतिक तत्वों की व्याख्या से होती है। इसके बाद पुस्तक में पितरों या पूर्वजों का विवरण दिया गया है। ऋग्वेद के अनुसार, पितर तीन प्रकार के होते हैं – अवर पितर, उत्परस पितर और मध्यम पितर। इनमें से अवर पितर सबसे महत्वपूर्ण हैं।

ग्रंथ यहाँ पढ़ें Pitrsameeksha – Vedic Eye

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