श्री शङ्कर शिक्षायातन २८ सितम्बर २०२६ को वार्षिक पण्डित मोतीलाल शास्त्री स्मृति व्याख्यान २०२६ प्रस्तुत करते हुए प्रसन्नता का अनुभव करता है।
इस व्याख्यान का विषय है — छन्दसमीक्षा।
छन्दःशास्त्र के विश्लेषण हेतु पंडित मधुसूदन ओझा जी ने इस ग्रन्थ की रचना की है । इस ग्रन्थ में छन्दस्तत्त्व की समीक्षा की गयी है जिसमें पद्यच्छन्दोवेदगत शिक्षा, गणित, निरुक्ति, व्याकरण व कल्पभेद से पाँच अङ्ग प्रतिपादित हैं । अर्थात् इस पद्यच्छन्दोवेद में छन्दःशिक्षा, छन्दोगणित, छन्दोनिरुक्ति, छन्दोव्याकरण एवं छन्दोकल्प इन पाँच अङ्गों का निरूपण किया गया है ।